समस्याओं को नीचे रख दीजिये

2आजकल की इस व्यस्त और भागदौड़ भरी ज़िंदगी में चिंताएं, तनाव, समस्यायेँ लगभग सभी के साथ लगी रहती हैं | कोई भी ऐसा नहीं है जिसे किसी तरह की समस्या न हो | ज़्यादातर चिंताओं और तनाव का बोझ हम बिना मतलब ही ढोते रहते हैं | हम समस्याओं के समाधान के बारे में ना सोच कर ज़्यादातर समस्या के बारे में ही सोचते रहते हैं जिससे समस्याए और बढ़ जाती हैं | बार बार और लगातार समस्याओं के बारे में ज़्यादा देर तक या रोज़ाना ही सोचने से समस्या तो कम नहीं होगी उल्टे हम ही तनावग्रस्त हो जाते हैं | हमारा स्वस्थ्य ख़राब हो जाता हैं या हम मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम भी हो सकते हैं |

मैं आपके सामने एक छोटी सी लेकिन बहुत ही प्रेरणादायक कहानी पेश कर रहा हूँ जिससे आप समझ सकते हैं कि ज़्यादा देर तक समस्याओं को या तनाव को अपने दिमाग में रखने से हमारे स्वास्थ्य और ज़िंदगी पर क्या असर पड़ सकता हैं ?

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करवा चौथ : 10 Tips से जीते अपने साथी का दिल

करवा चौथ का त्यौहार मूल रूप से पति-पत्नी के बीच रिश्तों को और मजबूत करने का दिन होता है। इस दिन एक दूसरे के लिए उत्साह, प्यार और समर्पण बाकी दिनों से कुछ ज्यादा होता है |  इस दिन पति अपनी पत्नियों को उपहार देते है तथा इस दिन पति पत्नी अपने शादी शुदा रिश्ते को और ज़्यादा मजबूत बनाने के लिए एक दूसरे से वादा करते है | लेकिन ये उत्साह , प्यार और समर्पण धीरे धीरे कम होने लगता हैं | अगर आप कुछ टिप्स का पालन करें तो इस प्यार को हमेशा के लिए बना कर रख सकते हैं |

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कुछ और टिप्स हैं जिन्हे अपनाकर आप अपने रिश्ते को और मजबूत और बेहतर बना सकते हैं |

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करवा चौथ पर प्रेम और समर्पण की दो कहानियां

विवाह, सोलह संस्कारों में से एक है। एक ऐसा बंधन, जिसमें बंधने के बाद हर पत्नी सदा सुहागिन ही रहना चाहती है। इसी के लिए हमेशा कामना करती है। व्रत, पूजा, दान पुण्य और न जाने क्या क्या करती है। यह सब पति की सुख समृद्धि के लिए। जीवन भर में न जाने कितने ही व्रत वह करती ही जाती है। इन व्रतों पर ही उसका विश्वास और इसी विश्वास में और अधिक मजबूत होता जाता है पति पत्नी का रिश्ता। एक ऐसा रिश्ता जो देता है एक दूसरे को ताकत, प्रेरणा और आगे बढ़ने का हौंसला। बुनता है एक दूसरे के लिए सपने और उन्हें पूरा भी करता है। आज करवा चौथ के इस खास अवसर पर हम इस रिश्ते की कुछ ऐसी ही कहानियां लेकर आए जहां पति पत्नी एक दूसरे की ताकत बन गए, एक दूसरे के प्रति समर्पित हो गए ताकि एक दूसरे का सपना पूरा कर सकें।

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करवा चौथ : पूजा की विधि और व्रत कथाएं

करवा चौथ का त्यौहार मूल रूप से पति-पत्नी के बीच रिश्तों को और मजबूत करने का दिन होता है। इस दिन सभी विवाहित स्त्रियां अपने पति की लम्बी उम्र और सुख समृद्धि के निर्जल व्रत रखती हैं | शाम को चन्द्रमा को अर्घ्य देकर , छलनी में से पति को देखकर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला जाता है | पति अपनी पत्नियों को उपहार देते है तथा इस दिन पति पत्नी अपने शादी शुदा रिश्ते को और ज़्यादा मजबूत बनाने के लिए एक दूसरे से वादा करते है | नए जोड़ो के  लिए यह पर्व और भी ज्यादा मायने रखता है। इस दिन एक-दूसरे को करीब से जानने और समझने का बेहतर अवसर होता है ! तथा एक दूसरे के लिए प्यार और समर्पण और ज्यादा बढ़ जाता है |

करवा चौथ के इस अवसर पर मैं आपको इस त्यौहार से जुडी कुछ खास बाते बता रहा हूँ |

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तोड़ दो उस बंधन को जो आपको सफल होने से रोकता है

8आज प्रतिस्पर्धा का दौर है और हममें से सभी लोग सफल होना चाहते हैं | तथा सफल होने के लिए मेहनत और कोशिश भी करते हैं | पर कुछ लोग सफल हो जाते हैं और कुछ बार बार कोशिश करने के बाद भी असफल हो जाते हैं |

विद्यार्थी अपने अच्छे भविष्य के लिए परीक्षा देते है | कुछ लोग अच्छी नौकरी के लिए इंटरव्यू देते हैं | लेकिन उनमे से सभी सफल नहीं हो पाते|

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हमारा व्यवहार ही हमें श्रेष्ठ बनाता है

7क्या आजकल की इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आप इस बात पर एक दम से यकीन कर सकते हैं कि हमारा व्यवहार या हमारा कोई छोटा सा काम कभी हमारी जान बचा सकता है| अगर आप विश्वास कर सकते हैं तो अच्छी बात है और अगर नहीं कर पा रहे हैं तो आज मैं आप लोगों के सामने ऐसी ही कहानी पेश कर रहा हूँ जिसे पढ़कर आप जानेंगे कि हमारा व्यवहार या हमारे द्वारा किया गया एक छोटा सा अच्छा कार्य भी हमें कैसे श्रेष्ठ बनाता है और जरुरत पड़ने पर हमारी जान भी बचा सकता है |

दोस्तों, ये कहानी मेरी रचना नहीं है ये मुझे मेरे एक दोस्त ने Whatsapp पर भेजी है | ये कहानी मेरे दिल को छू गयी | इसलिए मैं इसे आपके साथ शेयर कर रहा हूँ |

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बड़ा बनना है तो बड़ा सोचो

Motivational storiesदोस्तों ये कहानी दर्शाती है कि हम सोचते क्या हैं और कैसे सोचते हैं | हम अक्सर जैसा सोचते है वैसा ही बन जाते हैं | या हम अपनी सोच के अनुसार ही कार्य करने लग जाते हैं | आइये इस कहानी से इसे समझते हैं |

एक बार एक बहुत गरीब परिवार का बेरोजगार युवक नौकरी की तलाश में किसी दूसरे शहर जाने के लिए रेलगाड़ी से सफ़र कर रहा था | घर में कभी-कभार ही सब्जी बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटियां ही रखी थी | Continue reading

संघर्ष से ही हमारी जड़ें मजबूत होती हैं

8एक बार एक युवक को संघर्ष करते – करते कई वर्ष हो गए लेकिन उसे सफलता नहीं मिली | वह काफी निराश हो गया, और नकारात्मक विचारो ने उसे घेर लिया | उसने इस कदर उम्मीद खो दी कि उसने आत्महत्या करने का मन बना लिया | वह जंगल में गया और वह आत्महत्या करने ही जा रहा था कि अचानक एक सन्त ने उसे देख लिया |

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मुसीबतों से हिम्मत ना हारें

4एक किसान के पास एक बूढा गधा था | एक दिन किसान का गधा कुएँ में गिर गया । वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा | किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं ? अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका था,अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिए ।

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स्वयं पर विश्वास ही सफलता का पैमाना है

5सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉक्टर जगदीशचंद्र बोस ने यह खोज की थी कि सभी पेड़-पौधों में जीव-जंतु एवं प्राणी की तरह ही प्राण होते हैं, वे दुःख-दर्द का अनुभव करते हैं। यदि पौधों को जहर दे दिया जाए, तो वे भी मर जाते हैं। अपने इस शोध का प्रदर्शन करने के दौरान, इंग्लैंड में उन्होेंने एक इंजेक्शन में जहर भरकर उसे एक पौधे में लगा दिया, लेकिन पौधा मरा नहीं। वहाँ  पर एकत्रित भीड़ उनकी हंसी उड़ाने लगी ।

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मेहनत से ही छुआ जाता है बुलंदियों को

7एक बहुत ही गरीब लड़का था | उसे खाना खाने के लिए भी बहुत संघर्ष करना पड़ता था | दो वक्त की रोटी भी उसे सही से नसीब नहीं हो रही थी | वो लड़का बहुत ही मेहनती था | बिना किसी की सहायता लिए वह अपने स्कूल की फीस जमा किया करता था | वह भले ही एक समय खाना न खाता पर अपनी किताबें भी वह स्वयं ही खरीदता था |

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हमारे छोटे से प्रयास से भी बहुत बड़ा फर्क पड़ता है

3एक व्यक्ति रोज़ाना समुद्र तट पर जाता और वहाँ काफी देर तक बैठा रहता। आती-जाती लहरों को लगातार देखता रहता। बीच-बीच में वह कुछ उठाकर समुद्र में फेंकता, फिर आकर अपने स्थान पर बैठ जाता। तट पर आने वाले लोग उसे मंदबुद्धि समझते और प्राय: उसका मजाक उड़ाया करते थे। कोई उसे ताने कसता तो कोई अपशब्द कहता, किंतु वह मौन रहता और अपना यह प्रतिदिन का क्रम नहीं छोड़ता।

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