अरस्तु के अनमोल विचार

अरस्तु

अरस्तु

अरस्तु  एक यूनानी दार्शनिक थे। उनका जन्म 384 ई०पू० हुआ था और उनकी मृत्यु 322 ई०पू० हुई थी | वे प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु थे। उनका जन्म स्टेगेरिया नामक नगर में हुआ था । अरस्तु ने भौतिकी, आध्यात्म, कविता, नाटक, संगीत, तर्कशास्त्र, राजनीति शास्त्र, नीतिशास्त्र, जीव विज्ञान सहित कई विषयों पर रचना की।

अरस्तु के कुछ अनमोल विचारो को मैं यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ जो सभी के लिए बहुत ही प्रेरणादायक है |

अरस्तु के अनमोल विचार 

  1. मन की ऊर्जा ही जीवन का सार है।
  2. ख़ुशी ही जीवन का उद्देशय और अर्थ है।
  3. अच्छा व्यवहार सभी गुणों का सार है।
  4. धैर्य कड़वा है पर इसका फल मीठा है।
  5. महान आदमी हमेशा उदास प्रकर्ति के होते है।
  6. प्रकृति बेकार में कुछ नहीं करती है।
  7. एक दोस्त आपकी दूसरी आत्मा है।
  8. अच्छी शुरुआत से आधा काम हो जाता है।
  9. प्रकृति की सभी चीजों में कुछ ना कुछ अद्रुत है।
  10. डर बुराई की अपेक्षा से उत्पन्न होने वाला दर्द है।
  11. आशा जागते हुए देखा गया स्वप्न है।
  12. अनुशासन से स्वतंत्रता आती है।
  13. भगवान भी मज़ाक के शौक़ीन होते है।
  14. नौकरी में ख़ुशी, काम में निखार लाती है।
  15. गरीबी क्रांति और अपराध की जनक है।
  16. ख़ुशी आत्म निर्भरता से सम्बंधित होती है।
  17. हम बहादुर कार्यों के द्वारा ही बहादुर बन सकते है।
  18. जो अपने डर को जीत लेता है वो सही अर्थों में मुक्त होता है।
  19. अपने आप को जानना ही ज्ञान की शुरुआत है।
  20. शिक्षा की जड़ें कड़वी होती है लेकिन फल मीठे होते है।
  21. एक दोस्त क्या है? दो शरीर में रहने वाली एक आत्मा।
  22. कोई भी उस व्यक्ति से प्रेम नहीं करता जिससे वो डरता है।
  23. एक निश्चित बिंदु के बाद, पैसे का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
  24. शिक्षित और अशिक्षित में उतना ही फर्क है जितना की ज़िन्दगी और मौत में।
  25. वो जो एकांत में खुश रहता है या तो एक जानवर होता है या फिर भगवान।
  26. एक अच्छा इंसान और एक अच्छा नागरिक बनना एक बात नहीं है।
  27. बिना पागलपन के स्पर्श के किसी भी महान दिमाग का अस्तित्व नहीं होता है।
  28. सीखना कोई बच्चों का खेल नहीं है, हम बिना दर्द के नहीं सीख सकते है।
  29. दुर्भाग्य से उन लोगों का पता चलता है जो वास्तव में आपके मित्र नहीं है।
  30. जितना ज्यादा आप जानोगे, उतना ज्यादा आप यह जानोगे की आप कुछ भी नहीं जानते।
  31. सभी लोगों में सही का अनुसरण करने का साहस होना चाहिए न की जो स्थापित है उसका।
  32. जो एक अच्छा अनुयायी नहीं बन सकता वो एक अच्छा लीडर भी नहीं बन सकता ,
  33. युवा आसानी से धोखा खाते है क्योंकि वो शीघ्रता से उम्मीद लगाते है।
  34.  न तो हमें कायर होना चाहिए न ही अविवेकी बल्कि हमें साहसी होना चाहिए।
  35. एक मात्र स्थिर अवस्था वो है जिसमे सभी इंसान कानून के समक्ष बराबर है।
  36. लोकतंत्र तब है जब किसी अमीर की जगह कोई गरीब देश का शासक हो।
  37. किसी मनुष्य का स्वभाव ही उसे विश्वसनीय बनाता है, न कि उसकी सम्पत्ति।
  38. चरित्र को हम अपनी बात मनवाने का सबसे प्रभावी माध्यम कह सकते हैं।
  39. सभी भुगतान युक्त नौकरियां दिमाग को अवशोषित और अयोग्य बनाती हैं।
  40. आलोचना से बचने का एक ही तरीका है : कुछ मत करो, कुछ मत कहो और कुछ मत बनों।
  41. बुद्धिमान का उद्देश्य ख़ुशी को सुरक्षित रखना नहीं होता है बल्कि दुःख को दूर रखना होता है।
  42. साहस सभी मानवीय गुणों में प्रथम है क्योंकि यह वो गुण है जो आप में अन्य गुणों को विकसित करता है।
  43. मित्र का सम्मान करो, पीठ पीछे उसकी प्रशंसा करो, और आवश्यकता पड़ने पर उसकी सहायता करो।
  44. शिक्षित मन की यह पहचान है की वो किसी भी विचार को स्वीकार किए बिना उसके साथ सहज रहे।
  45. हमारे जीवन के गहनतम अंधकार के वक़्त हमें अपना ध्यान रोशनी देखने पर केंद्रित करना चाहिए।
  46. दोस्त बनना एक जल्दी का काम है लेकिन दोस्ती एक धीमी गति से पकने वाला फल है।
  47. पैसों के लिए की जाने वाली सभी नौकरियां हमारे दिमाग का अवशोषण और अवमूल्यन कर देती है।
  48. अच्छा लिखने के लिए खुद को एक आम इंसान की तरह व्यक्त करो, लेकिन सोचो एक बुद्धिमान आदमी की तरह।
  49. बुद्धिमान आदमी बोलता है क्योंकि उसके पास कहने के लिए कुछ होता है जबकि मुर्ख आदमी बोलता है क्योंकि उसे कुछ कहना होता है।
  50. आदमी एक लक्ष्यों की मांग करने वाला प्राणी है उसकी ज़िन्दगी का तभी अर्थ है जब वो अपने लक्ष्यों के लिए प्रयास करता रहे और उन्हें प्राप्त करता रहे।
  51. उत्कृष्टता वो कला है जो प्रशिक्षण और आदत से आती है। हम इस लिए सही कार्य नहीं करते कि हमारे अन्दर अच्छाई या उत्कृष्टता है, बल्कि वो हमारे अन्दर इसलिए हैं क्योंकि हमने सही कार्य किया है। हम वो हैं जो हम बार बार करते हैं, इसलिए उत्कृष्टता कोई कार्य नहीं बल्कि एक आदत है।
  52. अपने दुश्मनों पर विजय पाने वाले की तुलना में मैं उसे शूरवीर मानता हूं जिसने अपनी इच्छाओं पर विजय प्राप्त कर ली है; क्योंकि सबसे कठिन विजय अपने आप पर विजय होती है।
  53. कोई भी क्रोधित हो सकता है- यह आसान है, लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ सही तरीके से क्रोधित होना सभी के बस कि बात नहीं है और यह आसान नहीं है।
  54. वो जो बच्चों को शिक्षित करते हो वो उन्हें पैदा करने वालो से ज्यादा सम्मानीय है क्योकि वो उन्हें केवल ज़िन्दगी देते है जबकि वो उन्हें सही तरीके से ज़िन्दगी जीने की कला सीखाते है।

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