करवा चौथ पर प्रेम और समर्पण की दो कहानियां

विवाह, सोलह संस्कारों में से एक है। एक ऐसा बंधन, जिसमें बंधने के बाद हर पत्नी सदा सुहागिन ही रहना चाहती है। इसी के लिए हमेशा कामना करती है। व्रत, पूजा, दान पुण्य और न जाने क्या क्या करती है। यह सब पति की सुख समृद्धि के लिए। जीवन भर में न जाने कितने ही व्रत वह करती ही जाती है। इन व्रतों पर ही उसका विश्वास और इसी विश्वास में और अधिक मजबूत होता जाता है पति पत्नी का रिश्ता। एक ऐसा रिश्ता जो देता है एक दूसरे को ताकत, प्रेरणा और आगे बढ़ने का हौंसला। बुनता है एक दूसरे के लिए सपने और उन्हें पूरा भी करता है। आज करवा चौथ के इस खास अवसर पर हम इस रिश्ते की कुछ ऐसी ही कहानियां लेकर आए जहां पति पत्नी एक दूसरे की ताकत बन गए, एक दूसरे के प्रति समर्पित हो गए ताकि एक दूसरे का सपना पूरा कर सकें।

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करवा चौथ : पूजा की विधि और व्रत कथाएं

करवा चौथ का त्यौहार मूल रूप से पति-पत्नी के बीच रिश्तों को और मजबूत करने का दिन होता है। इस दिन सभी विवाहित स्त्रियां अपने पति की लम्बी उम्र और सुख समृद्धि के निर्जल व्रत रखती हैं | शाम को चन्द्रमा को अर्घ्य देकर , छलनी में से पति को देखकर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला जाता है | पति अपनी पत्नियों को उपहार देते है तथा इस दिन पति पत्नी अपने शादी शुदा रिश्ते को और ज़्यादा मजबूत बनाने के लिए एक दूसरे से वादा करते है | नए जोड़ो के  लिए यह पर्व और भी ज्यादा मायने रखता है। इस दिन एक-दूसरे को करीब से जानने और समझने का बेहतर अवसर होता है ! तथा एक दूसरे के लिए प्यार और समर्पण और ज्यादा बढ़ जाता है |

करवा चौथ के इस अवसर पर मैं आपको इस त्यौहार से जुडी कुछ खास बाते बता रहा हूँ |

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