समस्याओं को नीचे रख दीजिये

2आजकल की इस व्यस्त और भागदौड़ भरी ज़िंदगी में चिंताएं, तनाव, समस्यायेँ लगभग सभी के साथ लगी रहती हैं | कोई भी ऐसा नहीं है जिसे किसी तरह की समस्या न हो | ज़्यादातर चिंताओं और तनाव का बोझ हम बिना मतलब ही ढोते रहते हैं | हम समस्याओं के समाधान के बारे में ना सोच कर ज़्यादातर समस्या के बारे में ही सोचते रहते हैं जिससे समस्याए और बढ़ जाती हैं | बार बार और लगातार समस्याओं के बारे में ज़्यादा देर तक या रोज़ाना ही सोचने से समस्या तो कम नहीं होगी उल्टे हम ही तनावग्रस्त हो जाते हैं | हमारा स्वस्थ्य ख़राब हो जाता हैं या हम मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम भी हो सकते हैं |

मैं आपके सामने एक छोटी सी लेकिन बहुत ही प्रेरणादायक कहानी पेश कर रहा हूँ जिससे आप समझ सकते हैं कि ज़्यादा देर तक समस्याओं को या तनाव को अपने दिमाग में रखने से हमारे स्वास्थ्य और ज़िंदगी पर क्या असर पड़ सकता हैं ?

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तोड़ दो उस बंधन को जो आपको सफल होने से रोकता है

8आज प्रतिस्पर्धा का दौर है और हममें से सभी लोग सफल होना चाहते हैं | तथा सफल होने के लिए मेहनत और कोशिश भी करते हैं | पर कुछ लोग सफल हो जाते हैं और कुछ बार बार कोशिश करने के बाद भी असफल हो जाते हैं |

विद्यार्थी अपने अच्छे भविष्य के लिए परीक्षा देते है | कुछ लोग अच्छी नौकरी के लिए इंटरव्यू देते हैं | लेकिन उनमे से सभी सफल नहीं हो पाते|

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हमारा व्यवहार ही हमें श्रेष्ठ बनाता है

7क्या आजकल की इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आप इस बात पर एक दम से यकीन कर सकते हैं कि हमारा व्यवहार या हमारा कोई छोटा सा काम कभी हमारी जान बचा सकता है| अगर आप विश्वास कर सकते हैं तो अच्छी बात है और अगर नहीं कर पा रहे हैं तो आज मैं आप लोगों के सामने ऐसी ही कहानी पेश कर रहा हूँ जिसे पढ़कर आप जानेंगे कि हमारा व्यवहार या हमारे द्वारा किया गया एक छोटा सा अच्छा कार्य भी हमें कैसे श्रेष्ठ बनाता है और जरुरत पड़ने पर हमारी जान भी बचा सकता है |

दोस्तों, ये कहानी मेरी रचना नहीं है ये मुझे मेरे एक दोस्त ने Whatsapp पर भेजी है | ये कहानी मेरे दिल को छू गयी | इसलिए मैं इसे आपके साथ शेयर कर रहा हूँ |

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बड़ा बनना है तो बड़ा सोचो

Motivational storiesदोस्तों ये कहानी दर्शाती है कि हम सोचते क्या हैं और कैसे सोचते हैं | हम अक्सर जैसा सोचते है वैसा ही बन जाते हैं | या हम अपनी सोच के अनुसार ही कार्य करने लग जाते हैं | आइये इस कहानी से इसे समझते हैं |

एक बार एक बहुत गरीब परिवार का बेरोजगार युवक नौकरी की तलाश में किसी दूसरे शहर जाने के लिए रेलगाड़ी से सफ़र कर रहा था | घर में कभी-कभार ही सब्जी बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटियां ही रखी थी | Continue reading

संघर्ष से ही हमारी जड़ें मजबूत होती हैं

8एक बार एक युवक को संघर्ष करते – करते कई वर्ष हो गए लेकिन उसे सफलता नहीं मिली | वह काफी निराश हो गया, और नकारात्मक विचारो ने उसे घेर लिया | उसने इस कदर उम्मीद खो दी कि उसने आत्महत्या करने का मन बना लिया | वह जंगल में गया और वह आत्महत्या करने ही जा रहा था कि अचानक एक सन्त ने उसे देख लिया |

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स्वयं पर विश्वास ही सफलता का पैमाना है

5सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉक्टर जगदीशचंद्र बोस ने यह खोज की थी कि सभी पेड़-पौधों में जीव-जंतु एवं प्राणी की तरह ही प्राण होते हैं, वे दुःख-दर्द का अनुभव करते हैं। यदि पौधों को जहर दे दिया जाए, तो वे भी मर जाते हैं। अपने इस शोध का प्रदर्शन करने के दौरान, इंग्लैंड में उन्होेंने एक इंजेक्शन में जहर भरकर उसे एक पौधे में लगा दिया, लेकिन पौधा मरा नहीं। वहाँ  पर एकत्रित भीड़ उनकी हंसी उड़ाने लगी ।

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मेहनत से ही छुआ जाता है बुलंदियों को

7एक बहुत ही गरीब लड़का था | उसे खाना खाने के लिए भी बहुत संघर्ष करना पड़ता था | दो वक्त की रोटी भी उसे सही से नसीब नहीं हो रही थी | वो लड़का बहुत ही मेहनती था | बिना किसी की सहायता लिए वह अपने स्कूल की फीस जमा किया करता था | वह भले ही एक समय खाना न खाता पर अपनी किताबें भी वह स्वयं ही खरीदता था |

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हमारे छोटे से प्रयास से भी बहुत बड़ा फर्क पड़ता है

3एक व्यक्ति रोज़ाना समुद्र तट पर जाता और वहाँ काफी देर तक बैठा रहता। आती-जाती लहरों को लगातार देखता रहता। बीच-बीच में वह कुछ उठाकर समुद्र में फेंकता, फिर आकर अपने स्थान पर बैठ जाता। तट पर आने वाले लोग उसे मंदबुद्धि समझते और प्राय: उसका मजाक उड़ाया करते थे। कोई उसे ताने कसता तो कोई अपशब्द कहता, किंतु वह मौन रहता और अपना यह प्रतिदिन का क्रम नहीं छोड़ता।

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आप क्या करते हैं भगवान को सब पता है

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एक फकीर 50 साल से एक ही जगह बैठकर रोज़ाना 5 वक़्त की नमाज पढता था |

एक दिन आकाश से आकाशवाणी हुई और खुदा की आवाज आई………..

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आपको क्या बनना है ………शेर या गीदड़

1किसी गाँव में एक व्यक्ति रहता था |  एक बार वह किसी काम से अपने गाँव से शहर की ओर जा रहा था | रास्ते में एक जंगल पड़ता था | जब वह उस जंगल से गुजर रहा था तो उसे प्यास लगी | वह पास ही जंगल में बहने वाली नदी की तरफ गया | उसने पानी पिया और पानी पीने के बाद वापस लौटने लगा तो उसने देखा कि….वहीं नदी के किनारे एक गीदड़ बैठा था जो शायद चलने फिरने में असमर्थ था |

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जब तक तोड़ूंगा नहीं तब तक छोड़ूंगा नहीं : दशरथ मांझी

दशरथ मांझी : The  Mountain  Man

बहुत पुरानी कहावत है कि “अकेला चना कभी भाड़ नहीं फोड़ सकता |” लेकिन इस कहावत को पूरी तरह से झुठला दिया है बिहार के दशरथ मांझी ने | उन्होंने अपनी इच्छा शक्ति, दृढ़ संकल्प और सहस से अकेले दम पर वो असंभव कार्य कर दिखाया जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता |

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बोलने से पहले सोचें

अक्सर छोटी छोटी बातों पर गुस्सा करना मनुष्य की प्रवृति है | और गुस्से में किसी को डाँट देना, अपशब्द कहना या कुछ ऐसा कह देना जो हमें नहीं कहना चाहिए, ये भी स्वाभाविक है | लेकिन जब गुस्सा शाँत होता है तब हमें एहसास होता है कि हमने क्या सही किया और क्या गलत किया | कभी कभी हम गुस्से में हम अपने मित्रो से, अपने परिजनों से या दूसरे लोगो से  इतनी कड़वी बात कह देते हैं कि हमारे मित्र हमसे नाराज हो जाते हैं , बसे बसाये घर उजड़ जाते हैं , बेवजह हम दूसरे लोगो से दुश्मनी मोल ले लेते हैं | हमारे द्वारा कहे गए शब्दों का दूसरों पर क्या असर पड़ता है आइये इस कहानी से समझते हैं |

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